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मनुष्य का जीवन

 मनुष्य का जीवन मनुष्य  के कर्मों पर निर्भर करता है। मनुष्य अपने जीवन को सदाचार एवम सद्कर्म से सम्मानित तरीके से जी सकता है । विषम परिस्थितियों में भी जो अपने को अनुकूल बना कर , समय के अनुसार अपने में परिवर्तन करके सब के साथ सम्मानित व्यवहार करता है, वह व्यक्ति  सम्मानित जिंदगी जी सकता है । जब मनुष्य के अंदर समानता का भाव उत्पन्न होता है वह  सभी मनुष्य के नजरों में एक इंसान होते हुए भी भगवान के रूप में देखा जाने लगता है ।मनुष्य को हमेशा परिस्थितियों और समय के अनुकूल अपने को ढालना  चाहिए ।जो व्यक्ति अपने  आपको परिस्थितियों के अनुसार ढाल लिया , वह पूरी जिंदगी सफल व सम्मानित जिंदगी जीता है । धन्यवाद । पी के विश्वकर्मा देवारया।